
जिला अस्पताल बागेश्वर में 14 माह के मासूम बच्चे की इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई की है। थराली (चमोली) थाने से हस्तांतरित होकर आई जीरो एफआईआर के आधार पर कोतवाली पुलिस ने जिला अस्पताल के दो चिकित्सकों— डॉ. भूपेंद्र घटियाल और डॉ. अमित कुमार के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के पांच अन्य कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी है।
इन सात लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में अस्पताल के निम्नलिखित चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों को नामजद किया गया है:
- डॉ. भूपेंद्र घटियाल (चिकित्सक, जिला अस्पताल)
- डॉ. अमित कुमार (चिकित्सक, जिला अस्पताल)
- महेश कुमार (नर्सिंग अधिकारी)
- हिमानी (नर्सिंग अधिकारी)
- सूरज सिंह कनवाल (वार्डबॉय)
- ईश्वर सिंह टोलिया (एंबुलेंस कर्मी)
- लक्ष्मण कुमार (एंबुलेंस कर्मी)
एंबुलेंस में देरी और इलाज में लापरवाही का आरोप
पीड़ित परिजनों का गंभीर आरोप है कि मासूम की तबीयत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल लाया गया था, लेकिन वहां तैनात डॉक्टरों और कर्मचारियों ने इलाज में घोर लापरवाही बरती। इसके अलावा, बच्चे को समय रहते उच्च केंद्र रेफर करने के लिए एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई गई। परिजनों के अनुसार, एंबुलेंस मिलने में हुई देरी और इलाज में बरती गई संवेदनहीनता के कारण मासूम ने दम तोड़ दिया।
चमोली से बागेश्वर ट्रांसफर हुई ‘जीरो एफआईआर’
घटना के बाद पीड़ित परिवार ने चमोली जिले के थराली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। चूंकि मामला बागेश्वर जिला अस्पताल का था, इसलिए थराली पुलिस ने तत्काल ‘जीरो एफआईआर’ कायम कर मामला बागेश्वर कोतवाली को ट्रांसफर कर दिया। बागेश्वर पुलिस ने मामला दर्ज कर साक्ष्यों और बयानों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ भारी रोष देखा जा रहा है।





