
रामनगर बोर्ड की जांच में फर्जी और कूट रचित पाए गए शैक्षिक प्रमाण पत्र, विभाग में मचा हड़कंप
तीन ब्लॉकों के उपशिक्षा अधिकारियों को प्राथमिकी दर्ज कराने और वैधानिक कार्रवाई के दिए गए निर्देश
बागेश्वर। जिले के प्राथमिक विद्यालयों में फर्जी दस्तावेजों के सहारे लंबे समय से नौकरी हथियाए 10 शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी गई है। शिक्षा विभाग की इस बड़ी कार्रवाई से महकमे में हड़कंप मच गया है। हालांकि, इस कार्रवाई के साथ ही विभागीय जांच प्रणाली और अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सत्यापन सही ढंग से क्यों नहीं किया गया।मामला राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों से जुड़ा है। रामनगर बोर्ड द्वारा कराए गए दस्तावेजों के सत्यापन में 10 शिक्षकों के प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी और कूट रचित (जालसाजी से तैयार) पाए गए, जिसके बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से इनकी सेवा समाप्त कर दी है।लंबे समय तक फर्जी शिक्षकों के पढ़ाए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के पठन-पाठन को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ सेवा समाप्त कर देना काफी नहीं है, बल्कि इनसे वेतन की वसूली के साथ-साथ कठोर कानूनी कार्रवाई और तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।
सेवा समाप्त किए गए शिक्षकों एवं उनके विद्यालयों की सूची
कमला देवी — रा० प्रा० वि० ससौला (कांडा)चन्द्र प्रकाश आर्य — रा० प्रा० वि० रीमा क्वीटी (कपकोट)रजनी — रा० प्रा० वि० उछात (बागेश्वर)
लक्ष्मी आर्य — रा० प्रा० वि० स्यालडूँगा (कपकोट)रोहित कुमार — रा० प्रा० वि० चनौस चनूसी (कपकोट)
नेहा — रा० प्रा० वि० नरगोली (कांडा)संजय कुमार — रा० प्रा० वि० ठेली (कपकोट)
अरविन्द कुमार — रा० प्रा० वि० जलमानी (कपकोट)पंकज कुमार — रा० प्रा० वि० सुन्दिल (बागेश्वर)
प्रियंका — रा० प्रा० वि० उडियारी जगथाना (कपकोट)





