
बागेश्वर । राजनीति की कुर्सी पर बने रहने के लिए कानूनी दांव-पेंच खेलने का एक बेहद दिलचस्प और बड़ा मामला बागेश्वर में सामने आया है. उत्तराखंड पंचायतीराज (संशोधन) अध्यादेश, 2025 के कड़े प्रावधानों का उल्लंघन करने पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘असौं’ प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र-04 से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य कुंदन राम को अयोग्य घोषित कर दिया है. मुख्य विकास अधिकारी (CDO) एवं विहित प्राधिकारी आर.सी. तिवारी द्वारा शनिवार को इस संबंध में अंतिम आदेश जारी कर दिया गया है. कुंदन राम को तीन जीवित जैविक संतानें होने का दोष सिद्ध होने के बाद अपनी सदस्यता गंवानी पड़ी है.
ग्रामीणों की शिकायत पर बैठी थी उच्चस्तरीय जांच यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव प्रक्रिया के दौरान कुंदन राम पर अपनी तीसरी जीवित जैविक संतान के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने का आरोप लगा. इस संबंध में विकास खंड बागेश्वर के भगवत सिंह डसीला (08 अगस्त 2025), ओखलीसिरौद के महेंद्र प्रसाद (20 दिसंबर 2025) और ग्राम घटगाड के प्रमोद कुमार (23 मार्च 2026) ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर जांच की मांग की थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए निदेशक पंचायतीराज, उत्तराखंड के निर्देश पर सीडीओ ने एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया था. इस समिति में परियोजना निदेशक (डीआरडीए) को अध्यक्ष तथा जिला पंचायतराज अधिकारी (DPRO) व खंड विकास अधिकारी (BDO) बागेश्वर को सदस्य बनाया गया था.
कुर्सी बचाने के लिए बेटी को गोद देने का रचा ताना-बाना उत्तराखंड के पंचायतीराज नियम के तहत दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति के चुनाव लड़ने पर पूरी तरह पाबंदी है. कुंदन राम के घर 15 जुलाई 2025 को तीसरी संतान के रूप में पुत्र ने जन्म लिया था. इस सच को छुपाने और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए उन्होंने एक नया रास्ता निकाला. उन्होंने उप निबंधक कार्यालय बागेश्वर में जाकर 06 सितंबर 2025 को एक गोदनामा पंजीकृत कराया, जिसके तहत उन्होंने अपनी दूसरी जीवित बेटी अर्पिता चन्दोला को ज्योति पत्नी प्रकाश राम को गोद दे दिया, ताकि कागजों पर उनकी संतानों की संख्या केवल दो दिखाई दे सके. इसके साथ ही, तीसरे बच्चे के जन्म को छुपाने के उद्देश्य से उन्होंने ग्राम पंचायत बोहाला के परिवार रजिस्टर में अपने तीसरे बच्चे अर्पित का नाम दर्ज ही नहीं कराया था.
सरकारी और डिजिटल रिकॉर्ड्स के चक्रव्यूह में फंसे ‘माननीय’ कुंदन राम ने जिस गोदनामे को अपनी कानूनी ढाल बनाने की कोशिश की थी, असल में वही उनके गले की फांस बन गया. उप-निबंधक कार्यालय से मिले दस्तावेजों के मुताबिक, इस गोदनामे के ड्राफ्ट में कुंदन राम ने स्वयं ही यह लिखित रूप से स्वीकार कर लिया था कि उनकी तीन जीवित जैविक संतानें हैं.
इसके बाद जांच समिति ने जब महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड खंगाले तो सारे तथ्य शीशे की तरह साफ हो गए. विभाग के डिजिटल ‘पोषण ट्रैकर एप’ और सर्वे पंजिका में कुंदन राम की तीनों संतानों— अक्षिता (जन्म 25.11.2021), अर्पिता चन्दोला (जन्म 26.02.2023) और तीसरे पुत्र अर्पित (जन्म 15.07.2025) का नाम जन्मतिथि सहित दर्ज पाया गया. इसके अलावा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कांडा की टीकाकरण पंजिका और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) बागेश्वर द्वारा जारी डिजिटल टीकाकरण प्रमाण पत्र में भी ‘बेबी ऑफ पम्मी’ (कुंदन राम की पत्नी) के जन्म की तिथि 15 जुलाई 2025 ही प्रमाणित हुई. इन अकाट्य साक्ष्यों के सामने आने के बाद खुद कुंदन राम ने भी जांच समिति के समक्ष लिखित रूप से अपनी तीसरी संतान के जन्म की बात स्वीकार की.
15 दिनों के भीतर कुमाऊं कमिश्नर के यहां अपील की छूट उत्तराखंड पंचायतीराज (संशोधन) अध्यादेश, 2025 की धारा-90(1)(द) के तहत दो से अधिक जीवित जैविक संतान वाले व्यक्ति को जिला पंचायत सदस्य पद हेतु अयोग्य माना गया है. इसी आधार पर सीडीओ आर.सी. तिवारी ने कुंदन राम को पद से हटाते हुए मामला निस्तारित कर दिया है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्णय से पूर्व संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया था. हालांकि, इस आदेश के विरुद्ध कुंदन राम को पत्र प्राप्ति की तिथि से 15 दिवस के भीतर मण्डलायुक्त (कुमाऊं कमिश्नर) के सम्मुख अपील प्रस्तुत करने का अधिकार प्राप्त है





