जीरो टॉलरेंस की राह पर उत्तराखंड सरकार, अधिशासी अभियंता पर निलंबन का प्रहार

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार पर एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में धामी सरकार ने सूर्यधार बैराज योजना निर्माण के कार्य अवधि के दौरान कार्यरत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डीके सिंह को सस्पेंड कर दिया है।

यूकेडी नेता शिव प्रसाद सेमवाल ने सूर्य धार बांध परियोजना में शेड्यूल रेट से 20% अधिक दर पर कार्य कराने तथा निर्माण की लागत ₹120000000 अधिक आने पर भी सवाल उठाए थे। ‌ खुद सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज बांध परियोजना में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर चुके हैं और सचिव सिंचाई को विशेष जांच के आदेश भी दिए थे।जारी आदेश के मुताबिक सूर्यधार बैराज योजना निर्माण कार्य के अवधि के दौरान कार्यरत डीके सिंह, अधिशासी अभियन्ता, सिचाई खण्ड देहरादून द्वारा सूर्यधार बैराज योजना निर्माण कार्यों में पाई गई वित्तीय अनियमितता के दृष्टिगत शासन के पत्र संख्या-1 /52673 / 2022 -20523 IRRIT ESTB/8/11/2022 के द्वारा श्री जीवन चन्द्र जोशी, निदेशक, प्रशिक्षण सेंटर फॉर ट्रेनिंग एण्ड रिसर्च इन फाइनेशियल एडमिनिस्ट्रेशन की अध्यक्षता में त्रि-सदस्य समिति का गठन किया गया, जिसके क्रम में जाँच समिति द्वारा अपने पत्रांक- 77 / सूर्यधार बैराज / जाच / 2022-23 दिनांक 20 सितम्बर 2022 के द्वारा जांच आख्या उपलब्ध कराई गई है। चूंकि उक्त जाँच आख्या के आधार पर श्री डी0के0 सिंह, तत्कालीन अधिशासी अभियन्ता, सिचाई खण्ड देहरादून के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही प्रस्तावित है एवं जिन्हें जांचोपरान्त बृहद् दण्ड दिया जा सकता है।

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अधिशासी अभियंता सस्पेंड
अतः प्रश्नगत जाँच आख्या में इंगित अनियमितताओं के दृष्टिगत डीके सिंह, अधिशासी अभियन्ता को एतद्द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलम्बित किया जाता है। 2 निलम्बन की अवधि में डीके सिंह, अधिशासी अभियनता को वित्तीय नियम संग्रह खण्ड-2 भार 2 से 4 के मूल नियम 53 के प्राविधानों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि अर्द्धवेतन पर देय अवकाश वेतन की राशि के बराबर देय होगी तथा उन्हें जीवन निर्वाह के साथ कोई महंगाई भत्ता देय नहीं होगा, जिन्हें निलम्बन से पूर्व प्राप्त वेतन के साथ महंगाई भत्ता अथवा महगाई भत्ते का उपातिक समायोजन प्राप्त नहीं था। निलम्बन के दिनाक को प्राप्त वेतन के आधार पर अन्य प्रतिकर नत्ते भी निलम्बन की अवधि में इस शर्त पर देय होंगे, जब इसका समाधान हो जाय कि उनके द्वारा उस मद में व्यय वास्तव में किया जा रहा है, जिसके लिए उक्त प्रतिकर भत्ते अनुमन्य है।

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