
बागेश्वर। जनपद के गरुड़ क्षेत्र में रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक बेहद गंभीर मामले में माननीय सत्र न्यायालय बागेश्वर ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. सत्र न्यायाधीश पंकज तोमर की अदालत ने अपनी ही जन्मदाता (मां) के साथ दरिंदगी करने वाले दोषी अभियुक्त को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत 12 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही न्यायालय ने दोषी पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है.
जंगल में की थी दरिंदगी अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना साल 2024 की है, जब पीड़िता गरुड़ तहसील क्षेत्र में जंगल में लकड़ी लेने गई थी. इसी दौरान अभियुक्त पीछे-पीछे जंगल पहुंच गया और उसने एकांत का फायदा उठाकर पीड़िता को जबरन दबोच लिया. चिल्लाने पर पोल खुलने के डर से दरिंदे ने पीड़िता के मुंह में गमछा ठूंस दिया और दो बार जबरन दुराचार (बलात्कार) की वारदात को अंजाम दिया.
राजस्व पुलिस से नियमित पुलिस को ट्रांसफर हुआ था केस घटना के बाद पीड़िता की तहरीर पर पहले राजस्व उपनिरीक्षक क्षेत्र में मुकदमा पंजीकृत किया गया था. मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी बागेश्वर के आदेश पर विवेचना नियमित पुलिस को सुपुर्द की गई. इसके बाद थाना बैजनाथ पुलिस ने तत्परता से जांच करते हुए माननीय न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया.
12 गवाहों ने दिलाई सजा माननीय सत्र न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गोविंद बल्लभ उपाध्याय एवं सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) चंचल सिंह पपोला ने प्रभावी पैरवी की. इस दौरान पीड़िता सहित कुल 12 गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए गए.
अल्मोड़ा जेल भेजा गया दोषी पत्रावली पर मौजूद अकाट्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन अध्ययन करने के बाद सत्र न्यायाधीश ने अभियुक्त को धारा 64(2)(च) भारतीय न्याय संहिता के तहत दोषी करार दिया. अदालत ने उसे 12 वर्ष की कठोर कैद और 15,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई. अर्थदंड अदा न करने की दशा में उसे तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा. सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को जिला कारागार अल्मोड़ा भेज दिया गया है





