रूढ़ियों को दी मुखाग्नि: सरयू-गोमती संगम पर बेटियों ने दिया मां के पार्थिव शरीर को कंध

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कफलीगैर के लोब गांव की 85 वर्षीया बिस्नुली देवी के अंतिम संस्कार में बेटियों ने निभाई पुत्र की जिम्मेदारी

बागेश्वर। पावन तट सरयू-गोमती संगम पर परंपराओं और रूढ़ियों से आगे बढ़कर समाज को नई दिशा देने वाला एक भावुक दृश्य देखने को मिला। कफलीगैर तहसील के लोब गांव निवासी 85 वर्षीया बिस्नुली देवी के निधन के बाद उनकी बेटियों ने संगम घाट पर उन्हें मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। बेटियों के इस साहसिक कदम की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।

जानकारी के अनुसार, लोब गांव निवासी बिस्नुली देवी (85) का सोमवार को निधन हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए बागेश्वर स्थित सरयू-गोमती संगम घाट लाया गया। यहाँ जब मुखाग्नि का क्षण आया, तो पुरानी मान्यताओं को पीछे छोड़ते हुए उनकी बेटियों ने आगे बढ़कर मां की चिता को मुखाग्नि दी। संगम तट पर मौजूद हर ग्रामीण और राहगीर की आंखें इस मार्मिक दृश्य को देखकर नम हो गईं।

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कांग्रेस नेत्री ने निभाया बेटी का धर्म अंतिम विदाई देने वालों में बिस्नुली देवी की बेटी गोविंदी लोबियाल (पत्नी रमेश चंद्र) और लीला देवी (पत्नी शिव लाल) सहित अन्य परिजन शामिल रहे। गौरतलब है कि गोविंदी लोबियाल वर्तमान में हल्द्वानी के दमुवाडूंगा क्षेत्र में महिला कांग्रेस की ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में सक्रिय हैं। उन्होंने अपनी मां को मुखाग्नि देकर समाज के सामने यह उदाहरण पेश किया कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं।

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संगम घाट पर मौजूद रहे कई लोग अंतिम संस्कार के दौरान राजेंद्र प्रसाद, मनोज कुमार टम्टा, विवेक लोबियाल, सूरज कुमार, चंद्रशेखर और संजय कुमार समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और बेटियों द्वारा निभाई गई इस जिम्मेदारी को एक प्रेरक पहल बताया।

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