
बागेश्वर। क्या आप जानते हैं कि जिस बस में आप सवार हैं, वह सफर नहीं बल्कि ‘मौत की सवारी’ करा रही है? सोमवार को बागेश्वर में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला. परिवहन विभाग की टीम ने जब एक चलती बस को रुकवाया, तो अंदर का मंजर देखकर खुद अधिकारी भी सन्न रह गए.
30 की जगह 54 सवारियां, सुरक्षा गई तेल लेने! हल्द्वानी से आ रही एक केमू बस को एआर.टी.ओ. अमित कुमार ने माजियाखेत गेट के पास चेकिंग के लिए रोका. बस को देखते ही शक हुआ था कि इसमें क्षमता से अधिक लोग हैं, लेकिन जब गिनती शुरू हुई तो आंकड़ा 54 तक जा पहुंचा. यानी 30 सीटर बस में करीब दोगुने लोग ठूंस-ठूंस कर भरे थे.
बिना लाइसेंस ‘उस्ताद’ बना था परिचालक हैरानी की बात यहीं खत्म नहीं हुई. जब कागजों की जांच की गई तो पता चला कि बस का परिचालक बिना किसी वैध लाइसेंस के ही ‘टिकट-टिकट’ कर रहा था. एआर.टी.ओ. ने बिना देर किए इस लापरवाही पर 9800 रुपये का भारी-भरकम चालान काटा और बस को मौके पर ही सीज कर दिया.
सवाल: 160 KM तक क्या सोती रही पुलिस? इस कार्यवाही ने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है. यह बस हल्द्वानी से बागेश्वर तक करीब 160 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके आई थी. रास्ते में दर्जनों चेक पोस्ट और पुलिस बैरियर पड़े, लेकिन किसी की नजर इस ‘ओवरलोड’ बस पर नहीं पड़ी. गंतव्य से महज एक किलोमीटर पहले जब एआर.टी.ओ. ने इसे पकड़ा, तब जाकर इस ‘जानलेवा सफर’ पर ब्रेक लगा.
एआर.टी.ओ. अमित कुमार का कड़ा रुख: “यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा. ऐसी बसों को केवल चालान कर नहीं छोड़ेंगे, बल्कि सीधे सीज करेंगे. नियम तोड़ने वालों के लिए सड़कों पर कोई जगह नहीं है.”





