पीआईएल की आड़ में ब्लैकमेलिंग: बागेश्वर कोर्ट ने रंगदारी के आरोपी गोपाल बनवासी की जमानत अर्जी की खारिज

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बागेश्वर। जनहित याचिका (PIL) और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को ढाल बनाकर अवैध वसूली करने के आरोपी गोपाल चंद्र बनवासी उर्फ गोपाल राम को जिला एवं सत्र न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। सत्र न्यायाधीश पंकज तोमर की अदालत ने मामले की गंभीरता और अभियुक्त के आपराधिक इतिहास को देखते हुए उसकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

आरोप है कि गोपाल बनवासी ने एक स्थानीय होटल व्यवसायी को उसके होटल पर अतिक्रमण की पीआईएल (PIL) डालने और उसे ‘बुलडोज’ करवाने की धमकी दी थी। इस मामले को रफा-दफा करने के बदले उसने व्यवसायी से लाखों रुपयों की मांग की। अभियोजन के अनुसार, वह पहले ही 40,000 रुपये वसूल चुका था और बाद में 5 लाख रुपये की अतिरिक्त रंगदारी मांग रहा था।

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कोर्ट में पेश किए गए ऑडियो-वीडियो सबूत

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि उनके पास अभियुक्त द्वारा मांगी गई रंगदारी से जुड़े पुख्ता ऑडियो और वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं। पीड़ित व्यवसायी ने यह भी दलील दी कि सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार के कारण उनके होटल के व्यवसाय और सामाजिक प्रतिष्ठा को गहरा आघात लगा है, जिससे शादियों की बुकिंग तक प्रभावित हुई हैं।

आपराधिक इतिहास ने बिगाड़ा खेल

अदालत ने जमानत अर्जी खारिज करते समय गोपाल बनवासी के पुराने रिकॉर्ड पर कड़ी टिप्पणी की। अभियुक्त के खिलाफ पूर्व में भी अपहरण, रंगदारी और धमकी देने जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। विशेष रूप से वर्ष 2011 के एक मामले में उसे 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा भी सुनाई जा चुकी है।

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अदालत की सख्त टिप्पणी

सत्र न्यायाधीश ने इसे एक गंभीर आर्थिक अपराध (Economic Offence) मानते हुए कहा कि पीआईएल दाखिल करना रंगदारी वसूलने का लाइसेंस नहीं देता। विवेचना अभी जारी है, ऐसे में आदतन अपराधी को जमानत देना न्यायोचित नहीं होगा।

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