प्राकृतिक सौंदर्य भरपूर, खनिज, वन संपदा अपार, शासन-प्रशासन की अनदेखी से खुनौली झेल रहा पलायन की मार

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कमल कवि कांडपाल

जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर बसा बागेश्वर तहसील का सीमांत गांव खुनौली अपने प्राकृतिक सौंदर्य, देवस्थलों, प्राकृतिक खनिज संपदा से परिपूर्ण है। जहां एक तरफ गांव की भौगोलिक प्राकृतिक बनावट किसी पर्यटन स्थल से कम नहीं है। वहीं दूसरी तरफ असुविधाओं के शिकार ग्रामवासी गांव छोड़ने को मजबूर 40%आबादी कर चुकी है पलायन गांव में मूलभूत सुविधाओं का टोटा है पेयजल,सड़क, स्वास्थ्य,की असुविधायें गांव में आये दिन बने रहती हैं।
जंगली जानवरों के आतंक और सिंचाई साधनों की कमी के चलते लगभग आधी उपजाऊ भूमि बंजर हो गई है। काश्तकारों का खेती से मोह भंग हो रहा है।
तहसील जिला मुख्यालय अधिक दूरी पर होने से ग्रामवासियों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो पाती है।

खुनौली गांव में खनिज की चार खड़िया खानें संचालित हो रही हैं जिससे जिले के राजस्व में वृद्धि होती है लेकिन ग्रामीण आये दिन खनन न्यास बजट हेतु प्रदर्शन और ज्ञापन देने हेतु कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर रहते हैं।
ढालन खुनौली नाम से सड़क तो बन गयी लेकिन सड़क तक आने के लिए ग्राम वासियों को आज भी 1-2 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण बताते हैं कि विगत वर्षों लिंक मार्ग का कार्य शुरू तो हुआ लेकिन कुछ मामूली जमीनी के चलते कार्य अवरूद्ध हो गया।शासन प्रशासन मामले में हस्तक्षेप करता तो गांव सड़क से जुड़ सकता था, लेकिन किसी भी जिम्मेदार ने इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया और लिंक मार्ग निर्माण लटका पड़ा है।

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स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के मामले में गांव का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधर में लटका हुआ है 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा यहां बदहाल स्थिति को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की घोषणा की और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जमीनी अधिग्रहण भी कर लिया गया। निर्माण इकाई द्वारा 149.76लाख का भवन निर्माण का आंगणन बनाकर भेजा जिसके बाद की कार्यवाही आज तक लटकी हुई है।
गांव वालों को प्राथमिक उपचार हेतु आज भी 8-10 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है प्रसव पीड़ित महिलाएं,बूढ़े बुजुर्ग, सभी को आये दिन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

पेयजल के लिए प्राकृतिक स्रोत होने के बावजूद भी गांव वालों को आये दिन समस्या से जूझना पड़ता है गांव में स्वजल परियोजना एवं जल संस्थान की दो पाइप लाइन तो है लेकिन आये दिन अव्यवस्थित रहती है जिसके चलते ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।आज भी जहां केन्द्र एवं राज्य की पेयजल आपूर्ति के लिए अनेकों योजनाएं जिले में संचालित हैं और सरकार हर घर नल के दावे ठोकती है इन तमाम दावों के बाद भी खुनौली के ग्रामीणों की निर्भरता प्राकृतिक नौलै धारे आदि ही हैं। जिसका मुख्य कारण संचालित योजनाएं के धरातल पर व्यवस्थित तरीके से न उतर पाना है ।

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गांव का प्राकृतिक खेल मैदान जहां कम लागत पर भी तीनों ओर से सुंदर जंगल से घिरा एक भव्य स्टेडियम तैयार हो सकता है, विगत विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री धामी जी द्वारा उसकी घोषणा तो की गई लेकिन अभी उस दिशा में कोई कार्य नहीं हुआ है।

ढालन खुनौली सड़क जो लम्बे समय से लगभग 10 गांवों को काण्डा-बागेश्वर सड़क से जोड़ रही है उस पर परिवहन साधनों के क्षेत्र में भी शासन प्रशासन का रवैया उदासीन रहा है ग्रामीण लम्बे समय से रोडवेज या केमु बस की सुविधा की मांग करते आ रहे हैं लेकिन कोई सुधलेवा नहीं है।खुनौली से हल्द्वानी या दिल्ली की नियमित परिवहन सेवा शुरू की जाय तो ग्रामीणों को इसका लाभ मिलेगा और लोकल टैक्सी के मुकाबले कम किराए पर ग्रामीणों की जेब का बोझ भी कभ होता।

इन तमाम असुविधाओं पर अगर शासन प्रशासन गौर कर समाधान करे तो जिले का एक माॅडल गांव खुनौली बन सकता है जिसके लिए गांव में ही अपार संभावनाएं हैं जिनको व्यवस्थित करने की आवश्यकता है।