उत्तराखंड: पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर 1 अक्टूबर को काला दिवस का आह्वान

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देहरादून: 01 अक्टूबर 2022 को पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.पी. सिंह रावत के आवाह्न पर उत्तराखंड राज्य में काला दिवस मनाया जायेगा। बी.पी.सिंह ने कहा कि 01 अक्टूबर काला दिवस है क्योंकि इसी काले दिन 01 अक्टूबर 2005 को राज्य के कार्मिकों पर NPS रूपी काले कानून को थोपा गया था।

राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा (NOPRUF), उत्तराखंड के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ० डी० सी० पसबोला ने कहा कि “जहां एक कर्मचारी अपने पूरे सेवाकाल में सरकारी व्यवस्था के तहत कार्य करता है और उसके बदले मासिक वेतन पाता है। अब सरकार का मूल कर्तव्य है कि वह अपने कर्मचारियों के जीवन भर की सेवा के बाद, सेवानिवृत होने पर बाकी बचा जीवन कैसे सुखमय और खुशहाल बीते, इसका ख्याल रखना होगा। पुरानी पेंशन योजना इसी तरह की योजना है। जो सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत के पश्चात् सुरक्षित जीवन व्यतीत करने का विकल्प देती है।
पर 1 अक्टूबर 2005 के बाद से यह योजना बंद करके लाखों कर्मचारियों को बाजार आधारित नई पेंशन योजना के हवाले कर दिया गया है। जो कभी भी हमारे जीवन भर की कमाई को शून्य कर सकती है। यह योजना कितनी बेकार है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि किसी भी विधायक, सांसद, मंत्री को इससे आच्छादित नहीं किया गया है।देश के कई राज्यों में कर्मचारियों ने दवाब बनाकर इस योजना को खत्म करवाकर, पुरानी पेंशन योजना को लागू करवा दिया है।हम सभी को मिलकर चाहे वह पुरानी पेंशन योजना से आच्छादित हों या फिर नई पेंशन योजना से आच्छादित हों सभी को एकजुट होकर उत्तराखण्ड सरकार पर दवाब बनाकर पुरानी पेंशन योजना को लागू करवाने के लिए कार्य करना होगा।”

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डॉ० डी० सी० पसबोला
प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष,
राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा (NOPRUF), उत्तराखंड



आगे डॉ० पसबोला ने बताया कि “सरकार के अधीन काम करने का मतलब गुलामी नहीं होता, नैतिकता का ये पतन ही होगा, कि एक कर्मचारी की सारी जवानी को कार्य के लिए इस्तेमाल कर उसके बुढ़ापे की “आर्थिक सुरक्षा” “सामाजिक सुरक्षा” छीन लें!”


कितने दुर्भाग्य की बात है कि सरकार एक सूदखोर महाजन की तरह व्यवहार कर रही है जो अपने कर्मचारियों की ऊर्जा को निचोड़ लेती है और जब उन्हें सरकार की सहायता की सर्वाधिक आवश्यकता होती है, उस समय उन्हें शेयर बाजार के अनिश्चित उतार चढ़ावों के भरोसे छोड़ दिया जाता है।

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देश के कई राज्यों ने अब इस निर्मम और अनैतिक व्यवस्था को त्यागते हुए पुनः पुरानी पेंशन की व्यवस्था की ओर कदम बढ़ा दिया है। लेकिन हमारी सरकार अभी भी नींद में है। हम सबको मिलकर अब अपनी आवाज़ को और बुलंद करना होगा जिससे सरकार बहादुर के बाहर कानों में कंपन पैदा हो और उनकी निद्रा टूटे। इसी क्रम में सभी एनपीएस कार्मिक 1अक्टूबर शनिवार को काला दिवस मनाते हुए!
•अपने कार्यस्थल में काली पट्टी या काला मास्क लगाकर विरोध दर्ज करेंगे।
•सोशल मीडिया में अपनी डीपी में काली रंग का पोस्टर लगाएंगे। •रात्रि में 8 बजे से 9 बजे तक अपने घरों की लाइट बंद रखेंगे।

डॉ पसबोला ने सभी एनपीएस कार्मिकों से काला दिवस मनाकर इस आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।