मीडिया कर्मियों ने की पत्रकारिता की चुनौतियों और हिंदी पत्रकारिता की वर्तमान स्थिति पर चर्चा

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बागेश्वर। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर जिला पत्रकार संगठन एवं एनयूजे के संयुक्त तत्वाधान में गोष्ठी आयोजित कर वर्तमान दौर में पत्रकारों एवं पत्रकारिता की चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने हिन्दी पत्रकारिता पर विस्तार से चर्चा की।


यह्ना आयोजित गोष्ठी में पत्रकारों ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता तब तक जिंदा रहेगी जब तक पत्रकार जिंदा रहेंगे। क्योंकि हिंदी का अस्तित्व जितना पूर्व में प्रासंगिक था उतना ही आज के दौर में भी है। उम्मीद है भविष्य में और अधिक रहेगी। उन्होंने कहा कि बीते वर्षो में जो पत्रकारिता थी वो आज के दौर में नही रह गयी है। हर जगह मीडियाकर्मियों पर दबाव व चुनौतिया बढ़ रही है जो सबसे ज्यादा चिंताजनक है। मुख्य अतिथि एनयूजे के प्रदेश अध्यक्ष त्रिलोक चंद्र भट्ट ने कहा कि समाज को दिशा देने का काम पत्रकारिता करती है। जबकि समाज को आईना दिखाने का काम पत्रकार करता है।जो समय के साथ अब चुनौतीपूर्ण हो चुका है। इसलिए समय रहते पत्रकारों को एकजुट होकर कार्य करना होगा। वरिष्ठ पत्रकार रमेश कृषक ने कहा कि पत्रकारिता के माप दंड आज के दौर में बदल गए है। पत्रकार अब दरवारी के रूप में कार्य करने लगे है। जिस कारण उनका शोषण भी हो रहा है। कार्यक्रम में पत्रकार उमेश पंत के निधन पर शोक व्यक्त किया गया।
बैठक को अध्यक्षता संजय साह व संचालन दीपक पाठक ने किया। इस मौके पर सुरेश पांडेय,केशव भट्ट, घनश्याम जोशी, लोकपाल कोरंगा, हिमांशु जोशी, पूरन तिवारी, शंकर पांडेय, नीरज पांडेय, संजय साह, पंकज डसीला, सुंदर सुरकाली, लता प्रसाद, रमेश कृषक, कुलदीप मटियानी, जगदीश उपाध्यक्ष आदि मौजूद थे।

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