
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ यात्रा से पहले 12 खच्चरों में H3N8 इन्फ्लूएंजा वायरस की पुष्टि हुई है, जो नियमित मेडिकल जांच के दौरान सामने आया. प्रशासन ने संक्रमित खच्चरों को क्वारंटीन कर दिया है और उनकी देखभाल के लिए विशेष सेंटर तैयार किया गया है. IVRI मुक्केश्वर की विशेषज्ञ टीम वायरस के प्रसार और रोकथाम पर शोध कर रही है. यह वायरस मुख्य रूप से घोड़ों, कुत्तों और पक्षियों में पाया जाता है और दुर्लभ मामलों में इंसानों को संक्रमित कर सकता है. संक्रमण की रोकथाम के लिए यात्रा मार्गों पर सतर्कता बढ़ा दी गई है और प्रशासन ने सभी यात्रियों व खच्चर संचालकों से स्वच्छता बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध मामले की रिपोर्ट करने की अपील की हैउत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा से पहले एक नई चिंता ने जन्म लिया है। खबरें आ रही हैं कि राज्य के घोड़े और खच्चरों में घातक इन्फ्लूएंजा वायरस पाया गया है, जिसके बाद यात्रियों और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। 2025 की चारधाम यात्रा 30 अप्रैल से शुरू होने जा रही है, जिसमें गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट इस दिन खुलेंगे, जबकि केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के कपाट क्रमशः 2 और 4 मई को खुलेंगे।इन्फ्लूएंजा वायरस का खतराइस वायरस की मौजूदगी के बाद प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है और इस खतरे से निपटने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, इन्फ्लूएंजा वायरस का इंसानों में फैलने का खतरा भी लोगों के मन में सवाल पैदा कर रहा है। मुख्य रूप से घोड़े और खच्चरों में पाया गया यह वायरस एक संक्रामक वायरल संक्रमण है जो इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है।इन्फ्लूएंजा वायरस के लक्षण और खतरेइन्फ्लूएंजा वायरस हल्के से लेकर गंभीर लक्षणों का कारण बन सकता है। इसके आम लक्षणों में खांसी, बुखार, गले में खराश, बदन दर्द और सिरदर्द शामिल हैं। कुछ मामलों में, यह निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, सांस लेने में तकलीफ, और हार्ट संबंधी समस्याओं का कारण भी बन सकता है।किसे है अधिक खतरा?यह वायरस खासकर 65 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, डायबिटीज, अस्थमा, हार्ट डिजीज, और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए अधिक खतरनाक हो सकता है। ऐसे लोग इस वायरस के गंभीर परिणामों का शिकार हो सकते हैं।सतर्कता और सावधानी जरूरीअगर किसी को इन्फ्लूएंजा के लक्षण महसूस हों, तो उन्हें तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जाए, खासकर यात्रा के दौरान। राज्य और केंद्र सरकार दोनों ने इस वायरस को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि इस यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।इस दौरान सभी सुरक्षा उपायों का पालन करें और यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस होने पर चिकित्सीय सलाह लें।